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Purnia: जिला पूर्णिया के बारे में जानकारी| क्या है पूर्णिया जिला का इतिहास

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पूर्णिया (Purnia) जिला बिहार (Bihar) में स्थित है और बिहार राज्य की राजधानी पटना (Patna) से महज 300 किलोमीटर दूर है | शहरी और ग्रामीण आबादी के मामले में पूर्णिया शहर बिहार का चौथा सबसे बड़ा जिला है.कृषि इस जिले के निवासियों की मुख्य आजीविका है.यह बात अलग है की हाल के वर्षो में यहाँ की महिलाओ ने रेशम का उत्पदान शुरू कर इस इलाके को एक नयी पहचान दिलाने की कोशिश की है|

पूर्णिया जिला का इतिहास 

पिछले दिनों सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत के बाद एकबार फिर से बिहार का पूर्णिया जिला सुर्ख़ियों रहा है.दरअसल, सुशांत सिंह राजपूत का जन्म इसी पूर्णिया में हुआ था.लेकिन क्या पूर्णिया की पहचान महज यही है या इससे पूर्णिया का अपना कोई गौरवशाली इतिहास भी रहा है. इतिहास के आईने में पूर्णिया बहुत विशाल जिला हुआ करता था. यह भारत के सबसे पुराने जिलो में से एक है.

पूर्णिया के प्रसिद्द इतिहासकार डॉ रामेश्वर प्रसाद ने कई बरस की अनथक म्हणत के बाद यह मान्यता दी की पूर्णिया जिले की स्थापना 14 फरवरी 1770 को हुई थी.आपको ध्यान होगा की इस वक्त मुग़ल शाशन अपने अवसान पर था | इसी समय ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1757 में पलासी और 1764 में बक्सर की लड़ाई लड़ी. इस जंग में बंगाल के नवाब मुग़ल बादशाह और अवध के नवाब को मुंह की खानी पड़ी और ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुग़ल सम्राट से बंगाल, बिहार, और ओडिशा की दीवानी अपने नाम करा ली थी. 

पूर्णिया जिले की विशालता का अंदाज़ इस बात से लगाया जा सकता है की तब के पूर्णिया जिले में आज के पूर्णिया,अररिया (Araria),कटिहार (Katihar) और किशनगंज (Kishanganj) जिले शामिल थे. इसके अलावा बंगाल में दार्जिलिंग तक का इलाका भी इस जिले का हिस्सा था. हमसब जानते है की लोक रचनाकार के रूप में ख्यात और हिंदी फिल्म को हिरामन जैसा चरित्र देने वाले फणीश्वर नाथ रेणु (Phanishwar Nath ‘Renu) का जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार के अररिया जिले में फारबिसगंज के पास औराही हिंगना गावं में हुआ था. ख़ास बात यह है की अब यह अररिया जिला रेणु के जन्म के समय पूर्णिया जिले का हिस्सा था.

बापू की पूर्णिया यात्रा 

इतिहास बताता है की हमारे रस्त्रपिता महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi)ने अपने जीवन में तीन बार पूर्णिया की यात्रा की,1925.1927, और 1934 में वे पूर्णिया आये थे. यहाँ 13 अक्टूबर 1925 में बापू की पूर्णिया यात्रा का जिक्र विशेष रूप से करना जरुरी है.इस यात्रा में बापू पूर्णिया शहर से 25 मिल दूर एक गावं विष्णुपुर गए थे.उन्होंने इस दिन यहाँ एक पुस्तकालय का उद्घाटन किया था.एक जनसभा की थी.बापू को सुनने के लिए हजारो लोग जुटे थे. दिन में हुई जनसभा के बाद शाम में वे मत्री मंदीर नाम के पुस्कालय में गए. उसका उद्घाटन किया.चौधरी लालचंद जी ने अपनी पत्नी की स्मृति में इस पुस्तकालय की स्थापना की थी.

रानीपतरा में सर्वोदय आश्रम 

पूर्णिया जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर रानीपतरा में एतिहासिक सर्वोदय आश्रम है.कहते है की आज़ादी से पूर्व महात्मा गाँधी भी इस जगह पर आये थे, इसके बाद विनोभा भावे ने सर्वोदय आश्रम में कई महीने तक रहकर भूदान आन्दोलन का सञ्चालन किया था.

जेपी ने कराया था पत्नी का इलाज 

यहाँ के प्राकृतिक चिकित्सालय में जय प्रकाश नारायण ने तीन महीने तक रहकर अपनी पत्नी का इलाज करवाया था.बाद के दिनों में बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह को भी यहाँ आगमन हुआ था. 1957 में याह उन्होंने पुस्तकालय दो गुटों के वर्चास्व की लड़ाई की भेंट चढ़ा रहा है. इस जगह पर रेशम,खादी वस्त्र,तेल पेराई,चरखा से लेकर कई तरह के लघु और कुटीर उद्योग चलते थे.लोभ की अस्थानीय राजनीती ने इस एतिहासिक धरोहर को बहुत नुकसान पहुचाया है.

कालापानी और मिनी दार्जिलिंग 

पूर्णिया के बारे में यह जानना बहुत रोचक होगा की एक तरफ तो इसे बिहार की मिनी दार्जिलिंग कहा जाता है,दूसरी तरफ कभी यह कालापानी के रूप में कुख्यात था.दरअसल पूर्णिया का भूगोल बहुत अनोखा रहा है.यह तीन नदियों के त्रिकोण से घिरा हुआ है.सीर पर हिमालय पर्वत है.नदियों और हिमालय की वजह से यहाँ का मौसम हमेशा खुशनुमा बना रहता है.और यहाँ पर मई जून में ज्यादा गर्मी नहीं होती है.

अगर एक दो दिन तेज गर्मी रही भी तो फिर बारिश हो जाती है.यहाँ गर्मी के महीने में भी तेजी हवा चलती है और उसमें काफी नमी भी होती है.कह सकते है यहाँ का मौसम दार्जिलिंग से मिलता जुलता है और यही वजह है की पूर्णिया को बिहार का मिनी दार्जिलिंग कहा जाता है|

आजादी के बाद पूर्णिया में क्या बदलाव हुआ?

आजादी मिलने के समय पूर्णिया की स्थिति बहुत ही भयावह थी लोगों के पास कम नहीं के बराबर थे|किसान आत्महत्याए कर रहे थे| 

बिहार के पहले मुख्यमंत्री कौन थे?

बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्री डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह पूर्णिया की समस्याओं को पूरे देश से अवगत कराया उन्होंने निदान करने के लिए हरसंभव कोशिश की थी। बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री पूर्णिया से हैं जिसका नाम भोला पासवान शास्त्री हैै। 

कटिहार का उदय पूर्णिया से हुआ है

1976 ईस्वी में कटिहार को पूर्णिया से अलग कर कर एक नया जिला बना दिया गया था तभी से लोग कटिहार को जिला के नाम से जानते हैं। 

किशनगंज का उदय 1990 में हुआ

1990 में किशनगंज जिला का उदय पूर्णिया से हुआ था उसके बाद से किशनगंज को एक जिले के रुप में लोग जानते हैं।

अररिया का उदय अभी पूर्णिया जिले से ही हुआ है

1990 में अररिया जिला का भी उदय हुआ था इससे पहले अररिया पूर्णिया जिले का भाग हुआ करता था।

पूर्णिया प्रमंडल कब बना था? 

1990 में पूर्णिया प्रमंडल बना जिनमें चार जिले शामिल हैं उनका नाम है पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया। भागलपुर और पूर्णिया के बीच में परिसीमन 1990 में ही हुआ था जिसमें पूर्णिया का कुछ भाग भागलपुर जिले में शामिल किया गया था।

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Taufique Zafarhttps://khabarheekhabar.com
My name is Taufique Zafar, I send latest news, government news bollywood news and today's latest news on khabarheekhabar.com, I am a resident of Araria district of Bihar.

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