Tuesday, 16 July 2019, 6:10 AM

टाईम पास

धूर्त गीदड़ और कर्पूरतिलक हाथी की कहानी

Updated on 15 January, 2014, 21:51
ब्रह्मवन में कर्पूरतिलक नामक हाथी था। उसको देखकर सब गीदड़ों ने सोचा,""यदि यह किसी तरह से मारा जाए तो उसकी देह से हमारा चार महीने का भोजन होगा।'' उसमें से एक बूढ़े गीदड़ ने इस बात की प्रतिज्ञा की -- मैं इसे बुद्धि के बल से मार दूँगा। फिर उस... आगे पढ़े

सुरीला सफर

Updated on 15 January, 2014, 13:27
साक्षी गुनगुना रही थी। तभी उसकी सहेली शिखा ने उसे टोकते हुए कहा-तुम सही सुर-ताल के साथ गाना नहीं गा रही हो। अगर तुम्हें बढि़या गायिका बनना है, तो खूब अभ्यास करना होगा। यह सुनकर साक्षी नाराज हो गई और बाहर निकल गई। शिखा उसके पीछे-पीछे बहुत दूर तक गई... आगे पढ़े

सोना की मस्ती

Updated on 12 January, 2014, 14:09
रोजाना की तरह चीनी मछली ने अपनी नन्हीं बेटी रूहू को हिदायत दी, जब तक मैं वापस लौटूं तुम नदी के इसी छोर में तैरती रहना, आगे खतरा है। रूहू ने पानी में छपछपाते हुए कहा- हां मां, मुझे पता है आगे खतरा है और मैं रास्ता भटक सकती हूं।... आगे पढ़े

बाल कविता : सच्चे घर‌

Updated on 8 January, 2014, 23:26
मुझको दे दो प्यारी अम्मा, दो दो के दो सिक्के। उन सिक्कों से बनवाऊंगा, दो सुंदर घर पक्के। दो सुंदर घर पक्के अम्मा, दो सुंदर घर पक्के। इतने पक्के घुस ना पाएं उनमें चोर उच्चके। उनमें चोर उच्चके अम्मा, उनमें चोर उच्चके। अगर घुसे तो रह जाएंगे, वे घर में ही फंसके। अम्मा बोली दो रुपए में, ना बनते घर पक्के। ढेर ढेर रुपए... आगे पढ़े

बाल कविता : आसमान में पतंग

Updated on 8 January, 2014, 23:24
आसमान में चली पतंग मन में उठी एक तरंग लाल, गुलाबी, काली, नीली, मुझको तो भाती है पीली डोर ना इसकी करना ढीली सर-सर सर-सर चल सुरीली कभी इधर तो कभी उधर लहराती है फर फर फर। ... आगे पढ़े

जापान की शर्मनाक कहानी

Updated on 8 January, 2014, 23:19
1910 से 1945 के बीच जापानी सेना ने अपने कब्जे वाले देशों में लाखों महिलाओं से बलात्कार किया. इसके लिए बकायदा बलात्कार केंद्र बनाए गए थे. अफसोस यह है कि कुछ जापानी नेता अब इसे जायज ठहरा रहे हैं. ली ओक-सिओन अब 86 साल की हैं. उनकी पूरी जिंदगी जापानी सेना... आगे पढ़े

तेनालीराम और चोटी का किस्सा

Updated on 8 January, 2014, 23:15
चोटी की कीमत एक दिन बातों-बातों में राजा कृष्णदेव राय ने तेनालीराम से पूछा, ‘अच्छा, यह बताओ कि किस प्रकार के लोग सबसे अधिक मूर्ख होते हैं और किस प्रकार के सबसे अधिक सयाने?’तेनालीराम ने तुरंत उत्तर दिया, ‘महाराज! ब्राह्मण सबसे अधिक मूर्ख और व्यापारी सबसे अधिक सयाने होते हैं।’ ‘ऐसा... आगे पढ़े

कैसे कैसे उत्पाद

Updated on 1 January, 2014, 18:58
एक जगह बहुत भीड़ लगी थी एक आदमी चिल्ला रहा था कुछ बेचा जा रहा था आवाज कुछ इस तरह आई शरीर में स्फुर्ति न होने से परेशान हो भाई थकान से टूटता है बदन काम करने में नहीं लगता है मन खुद से ही झुंझलाए हो या किसी से लड़कर आए हो तो हमारे पास है ये दवा सभी... आगे पढ़े

बीट

Updated on 1 January, 2014, 18:55
मैंने देखा, सड़क पर कुछ गुंडे छेड़ रहे थे एक बच्ची को, रो रही थी वह, मदद मांग रही थी मुझसे, पर मैं चुप था, बहुत डरा हुआ था, हँस रहे थे गुंडे, बेबस थी वह बच्ची. डाल पर बैठा एक कौवा सब कुछ देख रहा था, चिल्ला रहा था गला फाड़कर, किए जा रहा था काँव-काँव, पर बेबस था वह भी. अंत में... आगे पढ़े

भारतीय नर्क

Updated on 1 January, 2014, 18:48
एक बार एक भारतीय व्यक्ति मरकर नर्क में पहुँचा, तो वहाँ उसने देखा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी देश के नर्क में जाने की छूट है । उसने सोचा, चलो अमेरिकावासियों के नर्क में जाकर देखें, जब वह वहाँ पहुँचा तो द्वार पर पहरेदार से उसने पूछा - क्यों... आगे पढ़े

भटकती आत्मा किसी के इंतजार में

Updated on 1 January, 2014, 18:45
 मैदानी भागों में भी अगर किसी कल-कल बहती नदी के किनारे कोई छोटा सा गाँव हो, आस-पास में हरियाली ही हरियाली हो, शाम के समय गाय-बकरियों का झुंड इस नदी के किनारे के खाली भागों में छोटी-बड़ी झाड़ियों के बीच उग आई घासों को चर रहा हो, गायें रह-रहकर रंभा... आगे पढ़े

बेटी दे दो - अकबर बीरबल के किस्से

Updated on 1 January, 2014, 18:43
एक शाम को बीरबल और बादशाह अकबर घूमने के लिए निकले. चलते चलते रास्ते में एक बड़ा बरगद का वृक्ष दिखाई दिया . उसे देख कर बीरबल ने कहा - देखिये जहाँपनाह ! कैसा अच्छा वर है ! बादशाह को शरारत सूझी , उन्होंने तुरंत कहा , बेटी दे दो... आगे पढ़े

तेनालीराम के किस्से : कुएँ बनाने का आदेश

Updated on 1 January, 2014, 18:38
एक बार राजा कृष्णदेव राय ने अपने गृहमंत्री को राज्य में अनेक कुएँ बनाने का आदेश दिया। गर्मियॉ पास आ रही थीं, इसलिए राजा चाहते थे कि कुएँ शीघ्र तैयार हो जाएँ, ताकि लोगो को गर्मियों में थोड़ी राहत मिल सके। गृहमंत्री ने इस कार्य के लिए शाही कोष से... आगे पढ़े

कहानी-अजीब इत्तफाक

Updated on 1 January, 2014, 18:32
लीला तिवानी अनिला और सुशील एक ही विषय की सह-अध्यापिकाएं थीं और स्वभाव मिलने के कारण पक्की सहेलियां भी। एक दिन अनिला ने सुशील को बताया कि कल 26 जनवरी को मेरे बहनोई सुशील का जन्मदिन है, इसलिए मुझे कल उनका जन्मदिन मनाने उनके घर जाना है। वह बोली, 'अरे मैं... आगे पढ़े

धोबी, धोबन, गधा और कुत्ते की कहानी

Updated on 29 December, 2013, 22:28
बनारस में कर्पूरपटक नामक धोबी रहता था। वह नवजवान अपने स्री के साथ बहुत काल तक विलास करके, सो गया। इसके बाद उसके घर के द्रव्य को चुराने के लिए चोर अंदर घुसा। उसके आँगन में एक गधा बँधा था और एक कुत्ता भी बैठा था। इतने में गधे ने... आगे पढ़े

साल नया फिर आया

Updated on 29 December, 2013, 22:21
लो साल नया फिर आया बच्चों इतिहास नायाब इस बार तुम रचो, बुरी आदतें अब तुरंत तुम छोड़ो बुरी संगत से भी अपना मुंह मोड़ो, कर लो बच्चों तुम एक यह प्रण सेवा में सबकी रहना है अर्पण, मात-पिता व गुरु का सदा मान करो उनके आदर्शों पर अभिमान करो, पढ़-लिखकर सदा अव्वल रहना बातें सदा तुम शालीन ही... आगे पढ़े

सजा बनी सीख

Updated on 29 December, 2013, 16:42
एक राजा था। वह बड़ा सनकी था। उसे यदि किसी व्यक्ति पर गुस्सा आता, तो उसे रात भर बर्फ जैसे ठंडे पानी में खड़े होने की सजा दे देता। एक दिन उसे किसी बात पर अपने महामंत्री अरुणेश पर गुस्सा आ गया। उसने अरुणेश को रात भर ठंडे पानी में... आगे पढ़े

सफेद सांप की कहानी

Updated on 27 December, 2013, 13:47
बहुत समय पहले ए मए सान पहाड़ में दो सांप थे, एक था सफेद सांप दूसरा था हरा सांप, दोनों सांप एक हजार साल की तपस्या के बाद दो सुन्दर औरत का रूप लेकर आज के सी हू सौन्दर्य झील के एक शहर में घोमने निकली। उन्होने अपना नाम पाए... आगे पढ़े

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..

Updated on 27 December, 2013, 13:43
मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं.. तुम मत मेरी मंजिल आसान करो.. हैं फ़ूल रोकते, काटें मुझे चलाते.. मरुस्थल, पहाड चलने की चाह बढाते.. सच कहता हूं जब मुश्किलें ना होती हैं.. मेरे पग तब चलने मे भी शर्माते.. मेरे संग चलने लगें हवायें जिससे.. तुम पथ के कण-कण को तूफ़ान करो.. मैं तूफ़ानों मे चलने का... आगे पढ़े

क्या लिखूँ..??

Updated on 27 December, 2013, 13:38
कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ.. या दिल का सारा प्यार लिखूँ.. कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखूँ या सापनो की सौगात लिखूँ.. मै खिलता सुरज आज लिखूँ या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ.. वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सांस लिखूँ.. वो पल मे बीते साल लिखूँ या सादियो लम्बी रात लिखूँ.. सागर सा... आगे पढ़े

गुलाबी तितली

Updated on 24 December, 2013, 13:42
भीनी बेटा आओ, अब घर चलें। मम्मी ने आवाज लगाई। पर भीनी तो बागीचे में फूलों और तितलियों के बीच मशगूल थी। मम्मी ने एक बार फिर आवाज दी, बेटा शाम हो रही है, हमें घर जाना है। पौधों के बीच दौड़ते हुए भीनी ने कहा, मम्मी बस एक मिनट।... आगे पढ़े

मुर्गी का दाम

Updated on 24 December, 2013, 13:40
डर के मारे किसान के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल पा रहा था। वहां इकट्ठी भीड़ में से कोई भी यह नहीं समझ पा रहा था कि किसान असल में कह क्या रहा है। बहुत समय पहले एक नगर में एक न्यायाधीश रहता था, जो किसी भी मामले में... आगे पढ़े

ट्रैफिक पुलिस की सीटी

Updated on 7 December, 2013, 10:12
एक बूढ़ी औरत बिना लापरवाही से सड़क पार कर रही थी, उसे ट्रैफिक पुलिस ने रोक लिया. ट्रैफिक ऑफिसर: मैं इतनी देर से सीटी बजा रहा हूं, आपको सुनाई नहीं देता? बूढ़ी औरत: क्यों नहीं सुनाई देगा, मैं बहरी नहीं हूं. ट्रैफिक ऑफिसर: तो आप रुकी क्यों नहीं? बूढ़ी औरत: बेटा, अब सीटी सुनकर... आगे पढ़े

पर्वत-सी पीर

Updated on 6 December, 2013, 13:06
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में, हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, सारी कोशिश... आगे पढ़े

संतोष का धन

Updated on 6 December, 2013, 12:59
पंडित श्रीराम नाथ नगर के बाहर एक कुटिया में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। एक दिन जब वे विद्यार्थियों को पढ़ाने जा रहे थे, उनकी पत्नी ने उनसे पूछा- आज भोजन क्या बनेगा? घर में एक मुट्ठी चावल ही है। पंडित जी ने पत्नी की ओर पल भर के... आगे पढ़े

मजेदार कहानी : अकल की दुकान

Updated on 5 December, 2013, 13:27
- स्मृति आदित्य एक था रौनक। जैसा नाम वैसा रूप। अकल में भी उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। एक दिन उसने घर के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा- 'यहां अकल बिकती है।' उसका घर बीच बाजार में था। हर आने-जाने वाला वहां से जरूर गुजरता था। हर कोई बोर्ड देखता,... आगे पढ़े

ऐसे मैं मन बहलाता हूँ

Updated on 5 December, 2013, 13:21
हरिवंश राय 'बच्चन' सोचा करता बैठ अकेले, गत जीवन के सुख-दुख झेले, दंशनकारी सुधियों से मैं उर के छाले सहलाता हूँ! ऐसे मैं मन बहलाता हूँ! नहीं खोजने जाता मरहम, होकर अपने प्रति अति निर्मम, उर के घावों को आँसू के खारे जल से नहलाता हूँ! ऐसे मैं मन बहलाता हूँ! आह निकल मुख से जाती है, मानव की... आगे पढ़े

आज मानव का सुनहला प्रात है

Updated on 4 December, 2013, 12:41
आज मानव का सुनहला प्रात है, आज विस्मृत का मृदुल आघात है; आज अलसित और मादकता-भरे, सुखद सपनों से शिथिल यह गात है; मानिनी हँसकर हृदय को खोल दो, आज तो तुम प्यार से कुछ बोल दो । आज सौरभ में भरा उच्छ्‌वास है, आज कम्पित-भ्रमित-सा बातास है; आज शतदल पर मुदित सा झूलता, कर रहा अठखेलियाँ हिमहास है; लाज... आगे पढ़े

बहुत खूबसूरत समॉ चाहती हूं।

Updated on 3 December, 2013, 17:20
(उषा यादव जी देश की प्रमुख गज़ल़कारों में शुमार की जाती हैं. वर्ष 1991 से लगातार देश की विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं में उऩकी ग़ज़लें पाठकों को आनंदित करती रहती हैं . उनकी प्रकाशित रचनाएं अमराईयां औऱ सोजे निहाँ काफी पसंद की जाती हैं . विद्यावाचस्पति , सारस्वत सम्मान से... आगे पढ़े

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस

Updated on 3 December, 2013, 14:15
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस गोपालप्रसाद व्यास है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं। है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं ।। अक्सर दुनियाँ के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं ।। यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर... आगे पढ़े

Gyan Vani Bhopal