Monday, 22 April 2019, 6:04 AM

टाईम पास

अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से : कल, आज और कल

Updated on 5 March, 2014, 17:46
एक दिन बादशाह अकबर ने ऐलान किया कि जो भी मेरे सवालों का सही जवाब देगा उसे भारी ईनाम दिया जाएगा। सवाल कुछ इस प्रकार से थे : - * ऐसा क्या है जो आज भी है और कल भी रहेगा? * ऐसा क्या है जो आज भी नहीं है और कल... आगे पढ़े

रहस्यमय कछुवा

Updated on 27 February, 2014, 13:39
कई साल पहले अयोध्या नगरी में सरयू के किनारे जहां आज गुप्तार घाट है, के पूरे इलाक़े पर एक बहुत बड़े रईस ज़मींदार ठाकुर गंभीर सिंह की ज़मीन थी! नदी के किनारे-किनारे फलदार वृक्ष, रंग-बिरंगे फूलों से सुसज्जित बाग थे, जिनमें साल के बारह महीने फूल खिले रहते थे। गुप्तार घाट... आगे पढ़े

प्रकाश...

Updated on 27 February, 2014, 13:36
’गंदगी भीतर ही रखो’ की गालियों के बीच मैं अपनी बात कहता हूँ। पीछे रह गए बहुत से चित्रों को अपने साथ घसीटता फिरता हूँ। बद्दुआ देके जाती लड़कियों को दूर तक देखता हूँ, और माँ से कहता हूँ...... ’अब मैं जा रहा हूँ।’ बहुत तेज़ प्रकाश का मूल कहीं ऊपर... दूर ऊपर, सबसे ऊपरी... आगे पढ़े

चांद आया मेरे घर

Updated on 27 February, 2014, 13:28
अंतरिक्ष के कमरे के बाहर की खिड़की से ज्यूरा पहाडियों के पीछे चांद चमक रहा था। नीली शर्ट पहने अंतरिक्ष ने खिड़की के पास जाकर इशारे से चांद को बुलाया-‘आ जाओ। मेरे पास आओ’। जब चांद ने उसकी बात नहीं सुनी तो उसने कुछ जोर से कहा- ‘मां कहती है तुम... आगे पढ़े

पांच सौ रुपए

Updated on 27 February, 2014, 13:27
बेटा संजीव, सुबह-सुबह कहां जा रहे हो? संजीव ने अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट करके कहा, ‘मां, यहीं एटीएम तक, कुछ रुपये निकालने हैं।’ अभी संजीव कुछ दूर ही गया था कि किसी ने उसे मदद के लिए पुकारा। उसने मुड़ कर देखा तो एक आदमी एकदम रोनी सूरत बना कर बोला-... आगे पढ़े

बेवफ़ाई के किस्से सुनाऊँ किसे ?

Updated on 27 February, 2014, 13:23
 ग़ज़ल बेवफ़ाई के किस्से सुनाऊँ किसे  ? बात दिल की है अपनी बताऊँ किसे  ? कौन दुनियाँ में अपना तलबगार है, फोन किस को करूँ मैं बुलाऊँ किसे ? रूठने और मनाने के मौसम गये, किससे रूठूँ मैं अब, मैं मनाऊँ किसे ? ज़ख़्म दो चार हो तो गिनायें भी हम, सैकड़ो ज़ख़्म अपने गिनाऊँ  किसे  ?   छोड़ देते... आगे पढ़े

शराबी यारों के ...किस्से

Updated on 27 February, 2014, 13:14
अक्सर हर इन्सान के कुछ ऐसे यार होते ही है कि जिनसे वो बचना चाहता है।  मेरे भी कुछ ऐसे  ही यार है जिनसे मै बचता फिरता हूँ। वेसे मेरा और उनका मिलना केवल होली के शुभ  अवसर पर  ही होता है वो भी कुछ 10 मिनट के लिये पर... आगे पढ़े

कल कैसे जिये हम वो आज अंदाज भूल गये - अक्षय आजाद भंडारी, धार

Updated on 26 February, 2014, 11:16
  कल कैसे जिये हम वो आज अंदाज भूल गये   कल के रीति रिवाज क्या थे   आज हम उसे सरल बना बैठै हैं   कल का भारत कैसा था   आज उसे बदल बैठै हैं   आज देश पर राजनीति समझौते पर मत किया करें   समझौतों मे नहीं देश चलाना है   जो आखें दिखायें... आगे पढ़े

समय

Updated on 19 February, 2014, 19:29
  नमक तेल मसाले डीज़ल पेट्रोल गैस आलू प्याज़ टमाटर लकड़ी कोयला कपड़ा सभी हो रहे हैं महंगे और सस्ते हो रहे हैं सम्बन्ध व  मौत के कारण   सस्ती हो गयी है  मौत ... आगे पढ़े

राह

Updated on 19 February, 2014, 19:28
मैं आंखें खोलकर चल लूं तुम आंखें खोलकर देखो मुझे जो भी मिले रस्ता मिले राही मगर देखो नहीं गन्तव्य से मतलब नहीं पहुंचूं नहीं चिंता मैं इतना सोच सकता हूँ स्वयं हित छोड़ कर देखो ... आगे पढ़े

मधुमक्खी का छत्ताः एक अत्यंत प्रासंगिक कहानी

Updated on 19 February, 2014, 19:25
एक बार की बात है। एक चमकदार और रंगीन फूलों से भरे घास के मैदान और उद्यानों के बीचोबीच स्थित एक पुराने पेड़ पर मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता स्थित था। छत्ते में एक रानी मधुमक्खी थी, जिसे कुछ वरिष्ठ मधुमक्खियों के साथ छत्ते के संचालन के लिए चुना गया... आगे पढ़े

एक अच्छा बेटा और एक बुरा बेटा

Updated on 19 February, 2014, 19:22
ज़रा कैन और हाबिल को देखिए। वे अब बड़े हो गए हैं। कैन एक किसान बन गया है। वह फल-सब्ज़ी और अनाज की खेती करता है। जबकि हाबिल एक चरवाहा बन गया। उसे भेड़ के छोटे-छोटे बच्चों, यानी मेम्नों की देखरेख करना बहुत अच्छा लगता है। धीरे-धीरे ये मेम्ने बड़े... आगे पढ़े

मुल्ला और पड़ोसी

Updated on 19 February, 2014, 19:20
एक पड़ोसी मुल्ला नसरुद्दीन के द्वार पर पहुंचा . मुल्ला उससे मिलने बाहर निकले . “ मुल्ला क्या तुम आज के लिए अपना गधा मुझे दे सकते हो , मुझे कुछ सामान दूसरे शहर पहुंचाना है ? ” मुल्ला उसे अपना गधा नहीं देना चाहते थे , पर साफ़ -साफ़ मन करने... आगे पढ़े

मुल्ला बने कम्युनिस्ट

Updated on 19 February, 2014, 19:20
एक बार खबर फैली की मुल्ला नसरुदीन कम्युनिस्ट बन गए हैं . जो भी सुनता उसे आश्चर्य होता क्योंकि सभी जानते थे की मुल्ला अपनी चीजों को लेकर कितने पोजेसिव हैं . जब उनके परम मित्र ने ये खबर सुनी तो वो तुरंत मुल्ला के पास पहुंचा . मित्र : “ मुल्ला... आगे पढ़े

...और मिल गया टॉमी

Updated on 9 February, 2014, 13:11
टॉमी, रॉमी और सिली नाम के तीन पपी थे। तीनों अभी बहुत छोटे थे। उनकी मॉम रीबू उनका हर समय ख्याल रखती थी। एक टूटे हुए मकान के एक छोटे से कौने में उसने अपना घर बना रखा था। टॉमी और रॉमी उसमें अपनी बहन सिली के साथ खूब ऊधम... आगे पढ़े

मसूरी यात्रा / काका हाथरसी

Updated on 29 January, 2014, 20:05
देवी जी कहने लगीं, कर घूँघट की आड़ हमको दिखलाए नहीं, तुमने कभी पहाड़ तुमने कभी पहाड़, हाय तकदीर हमारी इससे तो अच्छा, मैं नर होती, तुम नारी कहँ ‘काका’ कविराय, जोश तब हमको आया मानचित्र भारत का लाकर उन्हें दिखाया देखो इसमें ध्यान से, हल हो गया सवाल यह शिमला, यह मसूरी, यह है नैनीताल यह है... आगे पढ़े

नाम बड़े, दर्शन छोटे : काका हाथरसी

Updated on 29 January, 2014, 20:03
नाम-रूप के भेद पर कभी किया है गौर ? नाम मिला कुछ और तो, शक्ल-अक्ल कुछ और शक्ल-अक्ल कुछ और, नैनसुख देखे काने बाबू सुंदरलाल बनाए ऐंचकताने कहँ ‘काका’ कवि, दयाराम जी मारें मच्छर विद्याधर को भैंस बराबर काला अक्षर मुंशी चंदालाल का तारकोल-सा रूप श्यामलाल का रंग है जैसे खिलती धूप जैसे खिलती धूप, सजे बुश्शर्ट पैंट... आगे पढ़े

ख़रगोश और प्यासे हाथी

Updated on 29 January, 2014, 20:01
प्राचीन काल में एक सुदूर क्षेत्र में एक सोते के निकट कुछ हाथी बहुत सुखी जीवन व्यतीत करते थे। एक साल वहां वर्षा न हुयी और सोते के पानी दिन प्रतिदिन कम होता गया यहां तक कि सोता सूख गया। हाथी सोच में पड़ गए। हाथियों के सरदार के आदेश... आगे पढ़े

कौआ और साँप

Updated on 29 January, 2014, 19:58
सुदूर क्षेत्र में स्थित एक जंगल में एक पेड़ पर एक कौआ रहता था। उसे ऐसा दुख था जिससे वह छुटकारानहीं पा रहा था। कौए के घोसले के निकट एक बड़ा सा साँप भी रहता था। कौआ जब भी अंडा देता और उससे बच्चा निकलता, दुष्ट साँप इस अवसर की... आगे पढ़े

अकबर और बीरबल रोचक किस्से - पंडित जी

Updated on 29 January, 2014, 19:53
शाम ढलने को थी। सभी आगंतुक धीरे-धीरे अपने घरों को लौटने लगे थे। तभी बीरबल ने देखा कि एक मोटा-सा आदमी शरमाता हुआ चुपचाप एक कोने में खड़ा है। बीरबल उसके निकट आता हुआ बोला, ‘‘लगता है तुम कुछ कहना चाहते हो। बेहिचक कह डालो जो कहना है। मुझे बताओ,... आगे पढ़े

तेनालीराम के चतुराई के किस्से

Updated on 29 January, 2014, 19:45
अच्छा, तू माँ से भी मजाक करेगा ? कोई छह सौ वर्ष पुरानी बात है। विजयनगर का साम्राज्य सारी दुनिया में प्रसिद्ध था। उन दिनों भारत पर विदेशी आक्रमणों के कारण प्रजा बड़ी मुश्किलों में थी। हर जगह लोगों के दिलों में दुख-चिंता और गहरी उधेड़-बुन थी। पर विजयनगर के प्रतापी... आगे पढ़े

दो भाई और तोता-मैना !

Updated on 23 January, 2014, 21:52
मदनपुर के राजा रणजीत सिंह के दो छोटे-छोटे बेटे थे। वे न केवल सुन्दर थे बल्कि बुद्धिमान भी साबित हुए। जब रानी अचानक बीमार पड़ गई तो उनका जीवन त्रासदी से भर गया। राज्य का कोई भी वैद्य उसे रोग से मुक्त न कर सका। अन्तिम सांस लेने से पहले... आगे पढ़े

बाल कविता : चुहिया रानी

Updated on 23 January, 2014, 21:47
चुहिया रानी, चुहिया रानी लगती हो तुम बड़ी सयानी। जैसे हो इस घर की रानी, कभी तो करती हो मनमानी। कुतुर-कुतुर सब खा जाती, आवाज सुन झट से छिप जाती। जब भी घर में बिल्‍ली आती, दूम दबा बिल में चली जाती। ... आगे पढ़े

बाल कविता: चंदा मामा

Updated on 23 January, 2014, 21:44
चंदा मामा गोल मटोल, कुछ तो बोल, कुछ तो बोल। कल थे आधे, आज हो गोल खोल भी दो अब अपनी पोल। रात होते ही तुम आ जाते , संग साथ सितारे लाते। दिन में न जाने कहां छिप जाते, कुछ तो बोल, कुछ तो बोल। ... आगे पढ़े

फट रही है धरती!

Updated on 23 January, 2014, 12:55
बहुत समय पहले नंदन वन में चीकू खरगोश रहा करता था। उसे हमेशा प्रलय का डर सताता रहता। जैसे ही उसे खाली समय मिलता वो दुनिया के खत्म हो जाने के बारे में सोचने लगता। एक दिन वो बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर आराम कर रहा था। उसने पेड़... आगे पढ़े

परोपकार का फल

Updated on 19 January, 2014, 16:50
तेज हवा चल रही थी। एक बूढ़े आदमी के सिर से टोपी उड़ गई और एक पेड़ की टहनी पर लटक गई। रास्ते पर आते-जाते हर आदमी से वह बूढ़ा आदमी मदद मांगने लगा। दूर से आता हुआ आयुष यह सब देख रहा था। वह बूढ़े आदमी की मदद करना... आगे पढ़े

प्रेरक कथाः आखिरी दरवाजा आ गया

Updated on 18 January, 2014, 13:42
एक फकीर था। वह भीख मांगकर अपनी गुजर-बसर किया करता था। भीख मांगते वह बूढ़ा हो गया। उसे आंखों से कम दिखने लगा। एक दिन भीख मांगते हुए वह एक जगह पहुंचा और उसने आवाज लगाई। किसी ने कहा, आगे बढ़ जाओ। यह ऐसे आदमी का घर नहीं है, जो... आगे पढ़े

अंतिम छोर...

Updated on 15 January, 2014, 21:59
 प्रायवेट वार्ड नं. ३ जिन्दगी/मौत के मध्य जूझती संघर्ष करती गूंज रहे हैं तो केवल गीत जो उसने रचे जा पहुंची हो जैसे सूनी बर्फीली वादियों में वहाँ भी अकेली नहीं साथ है तन्हाइयां यादों के बड़े-बड़े चिनार मरणावस्था में पड़ी अपनी ही प्रतिध्वनि सुन बहती जा रही है किसी हिमनद की तरह ब्रह्माण्ड के अंतिम छोर तक..... ... आगे पढ़े

वासना

Updated on 15 January, 2014, 21:57
 वासना बस वास करती सड़क लतपथ सांस भरती इस जगह से उस जगह तक इस बदन से उस बदन तक वाहनों की आस भरती सड़क लतपथ सांस भरती वासना बस वास करती ज्योति बोली आँख खोलो कुल ह्रदय के पाट खोलो इस जखम से उस जखम तक उस वतन से इस वतन तक मानसिकता को टटोलो कुल ह्रदय के पाट खोलो ज्योति बोली... आगे पढ़े

कौए का जोड़ा और काले साँप की कहानी

Updated on 15 January, 2014, 21:52
किसी वृक्ष पर काग और कागली रहा करते थे, उनके बच्चे उसके खोड़र में रहने वाला काला सांप खाता था। कागली पुनः गर्भवती हुई और काग से कहने लगी -- ""हे स्वामी, इस पेड़ को छोड़ो, इसमें रहने वाला काला साँप हमारे बच्चे सदा खा जाता है।     दुष्टा भार्या शठं... आगे पढ़े

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