Monday, 22 April 2019, 5:50 AM

टाईम पास

दोस्ती’ : अनोखा स्वनिर्मित रिश्ता

Updated on 7 June, 2014, 13:04
रूही आठ साल की प्यारी लड़की थी। कक्षा तीसरी में पढ़ती थी। स्वभाव से चंचल और मिलनसार। कभी बगीचे में तितली पकड़ती तो कभी कोई छोटा पिल्ला घर ले आती और अपने हिस्से का दूध पिल्ले को दे देती। उसे दूध पीना पसंद नहीं था।  एक दिन रूही के स्कूल... आगे पढ़े

भोलू बना सितारा

Updated on 6 June, 2014, 16:51
भोलू, नमन, दिव्या और आंचल जगदंबा बस्ती में रहते थे। नमन और दिव्या को पढ़ना बहुत अच्छा लगता था। भोलू को ड्रामा पसंद था और आंचल को डांस करना अच्छा लगता था। सभी की उम्र 10 से 12 साल थी। इन दिनों चारों बच्चे अपने ही स्कूल में ड्रामा सीख... आगे पढ़े

वह कहीं गायब है...

Updated on 4 June, 2014, 17:33
वह कहीं गायब है... वह कोने में खड़ा महत्वपूर्ण था। उसकी जम्हाई में मेरी बात अपना अर्थ खो देती थी। वह जब अंधेरे कोने में गायब हो जाता तो मैं अपना लिखा फाड़ देता। वह कहीं गायब है.... ’वह फिर दिखेगा’... कब? मैं घर के कोनों में जाकर फुसफुसाता हूँ। ’सुनों... अपने घर में कुछ फूल आए... आगे पढ़े

जीजा साली पत्नी की जब मिली छह आँखें

Updated on 4 June, 2014, 17:29
टीवी पर आ रहे सीन से बरखा को झटका सा लगा। उसने अपने पास ही बेड पर बैठे जीजा को झिंझोड़ते हुए इशारा किया, कांत...कांत... देखो...देखो । टीवी पर एड चल रहा था... कल रात मुझ से भूल हुई...प्रिकोशन नहीं लिया...  मैं...गर्भवती होना नहीं चाहती... अनवान्टेड पे्रगनेन्सी को रोकने के... आगे पढ़े

भोलू कहां गया?

Updated on 13 May, 2014, 12:49
उन दिनों नंदन वन में बहुत चहल-पहल थी। बसंत के मौसम में पेड़ों पर नए-नए और कोमल बौर आ गए थे। रंग-बिरंगे फूलों के खिलने से नंदन वन की शोभा देखते बन पड़ रही थी। दो दोस्त गोलू और भोलू खरगोश के लिए यह मौसम और समय तो और भी... आगे पढ़े

तरबूज का पेड़

Updated on 11 May, 2014, 13:10
गपलू ने किसी दोस्त की बात का जवाब नहीं दिया। वो तो बस चुपचाप चलता जा रहा था। फिर वे सभी ऐसे मैदान में पहुंचे, जहां अकसर मेला लगता था। इन दिनों भी वहां मेला लगा हुआ था। गपलू अंदर पहुंचा और बाकी बच्चाों को बुलाने लगा। वहां एक पेड़... आगे पढ़े

योग्यता, क्षमता और रुचि से चुनें आगे की राह

Updated on 11 May, 2014, 13:07
एक बार जंगल में जानवरों ने सभा बुलाई। चर्चा का विषय था कि इंसान सभी जानवरों में सर्वोपरि क्यों है? हर क्षेत्र में इंसान आगे बढ़ रहा है। कुछ देर सोच-विचार और आपसी विमर्श के बाद जानवर एक मत हुए कि हो ना हो इसका कारण ‘स्कूल’ है। इंसान स्कूल... आगे पढ़े

जिंदगी...

Updated on 10 May, 2014, 19:17
रोज सैकड़ों चेहरे देखने को मिले, न जाने कितने फिर कभी नहीं मिले। हमने भुला दिए सारे शिकवे-गिले, क्या पता कोई आखिरी बार मिले। हम तो अपना दर्द दिल में समेटे चले, रोएंगे तब जब हिसाब का कांधा मिले। जिंदगी गुजर गई खुदा से नहीं मिले, मौत के बाद क्या पता मिले न मिले।                         -मिलिंद बायवार   ... आगे पढ़े

मेरी माँ के जैसी ही ये धरा है।

Updated on 7 May, 2014, 11:37
मेरी माँ के जैसी ही ये धरा है। इसका दिल भी करुणा से भरा है।। हे धरा, तुझमें माँ की तस्वीर नजर आती है, हे धरा, तुझमें हर जीव की तकदीर नजर आती है, हे धरा, तुम हम सबका पालन-पोषण करती हो, हे धरा, तुम में हर रिश्तों की जंजीर नजर आती है, हे धरा, तेरा... आगे पढ़े

जीनू-शीनू की चतुराई

Updated on 3 May, 2014, 13:19
जीनू और शीनू नाम के दो खरगोश थे। दोनों दोस्त थे। वे जहां कहीं भी खाने की तलाश में जाते, साथ-साथ जाते। लेकिन उन्हें बड़ा चौकन्ना होकर रहना पड़ता, क्यों उनके कई साथियों का शिकार किया जा चुका था। भीकू भेडिया तो इनकी हर समय तलाश में रहता कि कब... आगे पढ़े

अन्नदाता किसान

Updated on 17 April, 2014, 18:50
अन्नदाता किसान   हे अन्नाजी अन्नदाता किसान, अन्न बहुत उपजाता है। कृषि प्रधान है देश हमारा, कृषक यही लूटा जाता है।। तन-मन-धन सब कुछ अर्पण कर, जोखिम लेकर अन्न कमाता। खाद-बीज बिजली पानी का, महंगा बिल जब भर जाता।। लाभ-हानि लेखा-जोखा में, उसके हक में क्या आता। देनदार शावक का बनकर, कर्जदार जब बन जाता।। कर्ज के बदले किसान की, भू-बंधक खाता चढ़ जाता। अन्न दायिनी... आगे पढ़े

मत उड़ाना रुस्तम का मजाक

Updated on 16 April, 2014, 17:13
ओमा शेरनी ने चार बच्चे दिए। उनमें से तीसरे नंबर का बच्चा रुस्तम अपने बाकी भाई-बहनों से बिलकुल अलग था। बाकी सबका रंग भूरा था, लेकिन रुस्तम था सफेद और उसके शरीर में चितकबरे धब्बे थे। उसे अपने भाई की तरह उछल-कूद मचाने, शिकार करने का जरा भी शौक नहीं... आगे पढ़े

दीया का दोस्त

Updated on 9 April, 2014, 18:12
शाम के पांच बज रहे थे। दीया बार-बार दीवार पर लगी घड़ी की ओर देख रही थी। मम्मी ने उसे डांटते हुए कहा, ‘देखो दीया, जब तक तुम अपना होमवर्क पूरा नहीं करोगी, तुम्हें पार्क में जाने को नहीं मिलेगा।’ पर दीया का मन नहीं लग रहा था। दरअसल उसका... आगे पढ़े

कौए की चतुराई

Updated on 9 April, 2014, 18:10
बुद्धि नामक कौआ नंदनवन में रहता था। वह कौओं का नेता था। नंदनवन के पशु-पक्षी, कौओं की पूरी जमात को नापसंद करते थे। उन्हें किसी भी समारोह में नहीं बुलाते थे। सारे कौए यह देखकर बहुत दुखी होते थे। नंदनवन के नए राजा टाइगर सिंह राजा शेरसिंह के बेटे थे।... आगे पढ़े

व्हेल के जीवाश्म में मिली खमीर की बनाई बीयर

Updated on 6 April, 2014, 13:41
दिल्ली : बीयर पसंद करने वालों ने तो इसकी कई किस्में ट्राई की होंगी। दुनिया भर में जहां-जहां भी बियर और वाइन बनाई जाती हैं, वहां पीने वालों के लिए हमेशा नई किस्मों पर काम किया जाता है। ये वो किस्में होती हैं जिन्हें ये सोचकर और पूरी तरह से जांच... आगे पढ़े

सहज मिले अविनासी / कबीर

Updated on 2 April, 2014, 20:12
पानी बिच मीन पियासी। मोहि सुनि सुनि आवत हाँसी ।। आतम ग्यान बिना सब सूना, क्या मथुरा क्या कासी । घर में वसत धरीं नहिं सूझै, बाहर खोजन जासी ।। मृग की नाभि माँहि कस्तूरी, बन-बन फिरत उदासी । कहत कबीर, सुनौ भाई साधो, सहज मिले अविनासी ।। ... आगे पढ़े

साधो, देखो जग बौराना / कबीर

Updated on 2 April, 2014, 20:12
साधो, देखो जग बौराना । साँची कही तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना । हिन्दू कहत,राम हमारा, मुसलमान रहमाना । आपस में दौऊ लड़ै मरत हैं, मरम कोई नहिं जाना । बहुत मिले मोहि नेमी, धर्मी, प्रात करे असनाना । आतम-छाँड़ि पषानै पूजै, तिनका थोथा ज्ञाना । आसन मारि डिंभ धरि बैठे, मन में बहुत गुमाना... आगे पढ़े

पति-पत्नी के मजेदार किस्से : जोक्स:

Updated on 2 April, 2014, 20:10
एक बार एक महिला की शव यात्रा निकल रही थी. शवयात्रा के आगे आगे एक कुत्ता चल रहा था और पीछे बहुत सारे आदमी लाइन में चल रहे थे. तभी रास्ते में एक आदमी की नज़र आगे चल रहे कुत्ते और पीछे चल रही आदमियों की लाइन पर पड़ती है... आगे पढ़े

खाई और पुल

Updated on 2 April, 2014, 13:48
दो भाई थे। दोनों में प्रेम-भाव था और वे मिलकर खेती किया करते थे। इससे उनकी अच्छी आमदनी हो जाती थी, जिसे वे आपस में बांट लिया करते थे। लेकिन किसी छोटी-सी बात पर दोनों के बीच झगड़ा हो गया। बड़े भाई ने आधा खेत अपने कब्जे में कर लिया... आगे पढ़े

आया था भीख मांगने और बन गया राज पंडित

Updated on 31 March, 2014, 13:33
कौशांबी के राजा जितशत्रु ने चौदह विद्याओं में पारंगत तथा परम तपस्वी ब्राह्मण काश्यप को राजपंडित मनोनीत किया था। अचानक काश्यप की मृत्यु हो गई। उनके पुत्र कपिल ने एक दिन अपनी मां से पूछा, मां, जब राजा का पुत्र राजा की जगह ले सकता है, तो मैं राजपंडित क्यों... आगे पढ़े

सोहा को मिली सीख

Updated on 24 March, 2014, 12:12
सोहा को एग्जाम के दिनों में देर रात तक पढ़ने की आदत थी। गणित का पेपर देखकर वह काफी खुश हुई। उसे सारे सवाल आते थे। पर जब उन्हें हल करने बैठी, तो उसे एक फॉर्मूला याद नहीं आ रहा था। वह उस आसान सवाल को भी हल न कर... आगे पढ़े

मेहनत का फल

Updated on 24 March, 2014, 12:10
स्कूल की तरफ से कुछ बच्चे आगरा घूमने जा रहे थे। सभी बच्चों की तरह आनंद भी ताजमहल देखना चाहता था, पर उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि जाने वालों की सूची में अपना नाम दर्ज करा सके। तभी उसे एक आइडिया सूझा..। कुछ दिन बाद उसके घर से... आगे पढ़े

गधा, निरा गधा निकला

Updated on 22 March, 2014, 12:14
चंकी उल्लू उदास था। जंगल में सबके दोस्त थे, जो आपस में मिल-जुल कर खेलते, उड़ते, दाना चुगते, मिल कर गाना गाते और जोर-जोर से हंसते। पर चंकी उल्लू एकदम अकेला। न दोस्त न रिश्तेदार। पेड़ की ऊंची टहनी पर अपने घर में अकेला बैठा औरों को हंसते-खेलते देखता तो... आगे पढ़े

यादगार होली

Updated on 12 March, 2014, 21:38
भगतसिंह मार्केट के पास एक कॉलोनी थी। नाम था—होली कॉलोनी। यह कोई नहीं जानता था कि इस कॉलोनी का यह नाम किसने रखा। लेकिन नाम बड़ा अजीबोगरीब और दिलचस्प था। इस कॉलोनी की एक खास बात यह थी कि यहां क्रिश्चियन और मुसलिम समुदाय के लोग ही रहते थे। यह... आगे पढ़े

चोरी हो गए कुएं

Updated on 10 March, 2014, 12:33
एक बार राजा कृष्णदेव राय ने अपने गृहमंत्री को राज्य में अनेक कुएं बनाने का आदेश दिया। गर्मियां पास आ रही थीं, इसलिए राजा चाहते थे कि कुएं शीघ्र तैयार हो जाएं ताकि लोगों को गर्मियों में थोड़ी राहत मिल सके। गृहमंत्री ने इस कार्य के लिए शाही कोष से... आगे पढ़े

सोच सकता हूँ

Updated on 5 March, 2014, 17:56
मैं सुनाता आ रहा हूँ गीत कविता सुन जिसे क्यों सो गया है कुल जहाँ संकुल यहाँ क्यों आँख खोले सो गया है सत्य आशय झूठ संशय एक आशा एक भाषा सोच सकता हूँ मैं इतना तन बदन अब रो गया है ... आगे पढ़े

तमाशबीन

Updated on 5 March, 2014, 17:55
हताश से दीख रहे हैं ये हरे पेड़ बनती देख बिल्डिंगें अपने आस पास उन्हें पता है उनके इतने फलदार होते हुए भी उनके प्रति कोई नहीं व्यक्त करेगा अपनी सहानुभूति उनके पालनहार ही बनेंगे उनके भक्षक उन्हें देख निहत्था व लाचार उनकी भावभीनी विदाई की करेंगे तैयारी तोड़ दिए जायेंगे मकड़ी के जालों से दीखते शाखाओं पर सवार रिश्ते हरी-हरी पत्तियों पर भी नहीं खायेगा कोई तरस काटते जायेंगे पेड़ों के... आगे पढ़े

फूटा घड़ा

Updated on 5 March, 2014, 17:54
बहुत  समय  पहले  की  बात  है  , किसी  गाँव  में  एक   किसान  रहता  था . वह  रोज़   भोर  में  उठकर  दूर  झरनों  से  स्वच्छ  पानी  लेने  जाया   करता  था . इस  काम  के  लिए  वह  अपने  साथ  दो  बड़े  घड़े  ले  जाता  था , जिन्हें  वो  डंडे  में   बाँध  कर ... आगे पढ़े

हाथी और छह अंधे व्यक्ति

Updated on 5 March, 2014, 17:52
बहुत समय पहले की बात है , किसी गावं में 6 अंधे आदमी रहते थे. एक दिन गाँव वालों ने उन्हें बताया , ” अरे , आज गावँ में हाथी आया है.”  उन्होंने आज तक बस हाथियों के बारे में सुना था पर कभी छू कर महसूस नहीं किया था.... आगे पढ़े

अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से : ऊंट की गर्दन

Updated on 5 March, 2014, 17:50
बादशाह अकबर बीरबल की हाजिर जवाबी के बडे़ कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की, लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को धन राशि (पुरस्कार) प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बड़ी ही उलझन में थे कि महाराज को याद... आगे पढ़े

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